क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर
एनसीईआरटी, नई दिल्ली की एक घटक इकाई
एनएएसी द्वारा ए+ ग्रेड प्राप्त संस्थान
सामाजिक विज्ञान और मानविकी शिक्षा विभाग (DESSH) क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर के चार प्रमुख विभागों में से एक है। इस विभाग में शैक्षणिक संकाय अर्थात् हिंदी (सहायक प्रोफेसर: 01) के छह स्वीकृत पद हैं; अंग्रेजी (सहायक प्रोफेसर: 01 और एसोसिएट प्रोफेसर: 01); उर्दू (सहायक प्रोफेसर: 01); भूगोल (सहायक प्रोफेसर: 01) और इतिहास (सहायक प्रोफेसर: 01)। तथापि, वर्तमान में विभाग में हिंदी और भूगोल में क्रमशः दो प्रोफेसर (अंग्रेजी: 01 और उर्दू: 01) और एक-एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं। विभाग सक्रिय रूप से बी.ए., बी.एड. सहित पूर्व-सेवा शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में लगा हुआ है। एम.एड. और बी.एड. बी.एस.सी. बी.एड.में योगदान करने के अलावा औ एम.एड. कक्षाओं में भी डीईएसएसएच के संकाय सदस्य अनुसंधान, प्रशिक्षण, विकास और विस्तार सहित सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करते हैं। इसके अलावा, डीईएसएसएच के संकाय सदस्य संस्थान में समय-समय पर आयोजित की जाने वाली साहित्यिक गतिविधियों, प्रारंभिक साक्षरता कार्यक्रमों और हिंदी भाषा को बढ़ावा देने और भारत के संविधान में निहित मानवीय मूल्यों को विकसित करने से संबंधित कार्य करते हैं। विभाग के पास सुसज्जित भूगोल प्रयोगशाला और भाषा प्रयोगशाला (प्रगति में) है।
हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू उत्तरी क्षेत्र की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में भाषा शिक्षा के पोषण के लिएडीईएसएसएच की त्रिकोणीय भाषाई विविधता का गठन करते हैं। भाषा सीखना अवधारणाओं को सीखने का हिस्सा है, क्योंकि अवधारणाओं का निर्माण भाषा के माध्यम से होता है। अवधारणा की समग्र दृष्टि को सहसंबद्ध और समझने की क्षमता के रूप में भाषाई प्रवीणता की प्रभावकारिता अत्यंत उल्लेखनीय है। भाषा अकादमिक साक्षरता का अनिवार्य अंग है और सीखने की भाषा ही अकादमिक क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य को पूरा करती है। वास्तव मेंभाषा, ज्ञान और अनुभव की बाधाओं को खोलने के लिए एक कुंजी के रूप में कार्य करती है। यह संचार का एक साधन है जिसके माध्यम से बच्चा अतीत पर विचार करता है, वर्तमान को समझता है और भविष्य की ओर अग्रसर होता है।
यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि भाषा और साहित्य के मध्य बहुत धनिष्ठ सम्बन्ध है। साहित्य केवल सूचना प्राप्त करने के लिए नहीं पढ़ाया-सिखाया जाता। यह आनन्द का उद्देश्य भी पूरा करता है। साहित्य सौन्दर्य की वस्तु है क्योंकि इसमें भाषा की सुन्दरता, रूप की सुन्दरता, विचारों की सुन्दरता और भावों की सुन्दरता है। भाषा का उपयोग शून्य में नहीं हो सकता, इसे एक उपयुक्त संदर्भ चाहिए और साहित्य एक सर्वोत्तम सन्दर्भ है, जहाँ भाषा का उपयोग किया जा सकता है। तथापि साहित्य शिक्षण का उद्देश्य भाषा शिक्षण होना चाहिए क्योंकि भाषा किसी भी विषय के द्वार खोलने की कुँजी है। पाठ्यचर्या में सांगो-पांग भाषा पर जोर देना चाहिए, जिससे विषयों व संकायों से परे सभी विद्यार्थी-शिक्षकों की भाषाई दक्षता और संप्रेषण कौशलों का विकास हो सके और उनको उत्तम अध्ययनसाय ‘शिक्षण’ के लिए अधिक रोजगारपरक और उपयुक्त बना सकें।
वर्तमान में सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत आने वाले विषयों में भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान शामिल हैं। सामाजिक विज्ञान पढ़ाने और सीखने का मुख्य उद्देश्य जिम्मेदार नागरिकों को तैयार करना है, जो सामाजिक और नैतिक मूल्यों की रक्षा में प्रहरी की भूमिका निभाते हैं। विभाग समुदाय के साथ काम करने से संबंधित गतिविधियाँ करता है, जो सेवा-पूर्व शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों का एक अभिन्न अंग है, जो शिक्षार्थी-अध्यापकों को वास्तविक जीवन स्थितियों में चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।